
GM फसलों पर झुकने को तैयार नहीं भारत, US का दबाव जारी: ‘MAGA’ किसानों के लिए इंडिया बना बड़ा दांव
अपडेटेड – 15 दिसंबर 2025,| अमेरिका का एक उच्चस्तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल पिछले हफ्ते भारत दौरे पर आया था। इस दौरान उसने भारत पर अमेरिकी सोया और मक्का (कॉर्न) को बाजार में मंजूरी देने का दबाव बनाए रखा। यह मांग ऐसे समय पर की जा रही है, जब इन फसलों के जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) होने को लेकर भारत में साफ आपत्ति है और GM फसलों पर प्रतिबंध लागू है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका में इस वक्त गंभीर कृषि संकट चल रहा है। रिकॉर्ड पैदावार, भारी उत्पादन सरप्लस, किसानों पर बढ़ता वित्तीय दबाव और गोदामों में भरा अनाज—इन सब वजहों से अमेरिकी किसान मुश्किल में हैं। इसी कारण अमेरिकी सरकार भारत जैसे बड़े बाजार पर नजर गड़ाए हुए है।
GM फसलों पर भारत, अमेरिका (US) की बातचीत
भारत और अमेरिका के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं में GM फसलों का मुद्दा एक बार फिर सबसे बड़ी अड़चन बनकर उभरा है। अमेरिका जहां इसे एक व्यापारिक अवसर के तौर पर देख रहा है, वहीं भारत इसे अपने किसानों, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मसला मान रहा है।
भारत का साफ मानना है कि GM सोया और मक्का के आयात से देश के घरेलू किसानों पर सीधा असर पड़ेगा। पहले से ही कम कीमतों और लागत बढ़ने की चुनौती झेल रहे भारतीय किसान, सस्ते आयात के दबाव में और कमजोर हो सकते हैं। यही वजह है कि सरकार इस मामले में किसी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।
इसके अलावा, भारत में GM फसलों को लेकर जनमत भी काफी संवेदनशील रहा है। कई किसान संगठन और सामाजिक समूह लंबे समय से GM फसलों के विरोध में आवाज उठाते रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है और लंबे समय में इसके स्वास्थ्य पर असर को लेकर भी पर्याप्त स्पष्टता नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने बातचीत के दौरान यह भी सुझाव दिया कि भारत सीमित मात्रा में या विशेष शर्तों के साथ इन फसलों के आयात पर विचार करे। लेकिन भारतीय पक्ष ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि जब तक GM फसलों पर घरेलू कानून और नीतियां नहीं बदलतीं, तब तक इस पर कोई आगे की चर्चा संभव नहीं है।
जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत तेज हो सकती है, लेकिन GM फसलों का मुद्दा लंबे समय तक बातचीत का सबसे कठिन अध्याय बना रह सकता है। भारत इस मामले में फिलहाल अपने रुख पर कायम है और संकेत साफ हैं कि GM फसलों पर कोई जल्दबाज़ी वाला फैसला नहीं लिया जाएगा।
मामले से जुड़े एक सूत्र ने बिज़नेसलाइन को बताया,
“अमेरिकी किसान बंपर फसल, चीन के साथ व्यापारिक तनाव और ब्राजील जैसे देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण जूझ रहे हैं। ट्रंप प्रशासन भारत को एक बड़ा और अहम वैकल्पिक बाजार मानता है, जिससे ‘MAGA’ समर्थक किसानों को राहत दी जा सके। यही वजह है कि अमेरिकी वार्ताकार मक्का, सोया और अन्य कृषि उत्पादों के लिए भारत में ज्यादा बाजार पहुंच की मांग कर रहे हैं।”
हालांकि, नई दिल्ली ने वॉशिंगटन को बार-बार साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से सोया और मक्का आयात करने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि ये फसलें GM हैं और भारत में GM फसलों पर प्रतिबंध है। अमेरिका इस समय भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, लेकिन इस मुद्दे पर भारत ने सख्त रुख अपनाया हुआ है।
सूत्र ने आगे कहा,
“भारत के लिए अमेरिका से नॉन-GM सोया और मक्का खरीदना भी मुश्किल है, क्योंकि कुल अमेरिकी उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी बहुत कम है और इनके लिए अलग से सही तरीके की सेग्रेगेशन व्यवस्था मौजूद नहीं है। यह भारत के लिए एक रेड लाइन है और देश केवल नॉन-GM किस्में ही खरीद सकता है।”
फिलहाल, GM फसलों के मुद्दे पर भारत अपने फैसले पर अडिग है और साफ संकेत दे चुका है कि इस मामले में कोई समझौता आसान नहीं होगा।
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